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21 जून काे कंकणाकृति गहण मृगशिरा नक्षत्र और मिथुन राशि में होने के कारण विश्व में तूफान और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाए घटनाये हाेगी,  रविवार को सूर्य ग्रहण पर ग्रहों की ऐसी स्थिति 500 सालों में नहीं बनी --महाराज श्री आनंद गिरी 
June 16, 2020 • Rajesh Jauhri • क्षेत्रीय

21 जून काे कंकणाकृति गहण मृगशिरा नक्षत्र और मिथुन राशि में होने के कारण विश्व में तूफान और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाए घटनाये हाेगी !          रविवार को सूर्य ग्रहण पर ग्रहों की ऐसी स्थिति 500 सालों में नहीं बनी ....महाराज श्री आनंद गिरी       

           

 देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट के साथ अन्य महामारी फैलने से मृत्यु दर में भी होगी बढ़ोतरी...श्री आनन्द गिरी.. इंदौर ...... श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महंत श्री आनंद गिरी महाराज ( अत्या बाबा )की मानें तो आज मंगलवार (15 जून) को सूर्य ने मिथुन राशि में प्रवेश किया है। इसके बाद 18 जून को मंगल का राशि परिवर्तन होगा। मंगल के राशि परिवर्तन से कई राशियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। 18 जून को ही बुध मिथुन राशि में व्रकी हो जाएगा और 20 जून को अस्त भी हो जाएगा। 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा। जून के आखिरी सप्ताह में शुक्र मार्गी हो जाएगा। 30 जून को गुरु धनु राशि में वक्री हो कर चलेगा।इस दिन सूर्य और पृथ्वी के बीच 15,02,35,882 किमी की दूरी होगी। इस समय पर चांद अपने पथ पर चलते हुए 3,91,482 किमी की दूरी बनाए रखेगा।    

 

दो बड़ी खगोलीय घटनाएं::- मंहत श्री आनंद गिरी महाराज के अनुसार पांच दिनों बाद यानि कि रविवार दिनांक 21 जून को दो बड़ी खगोलीय घटनाएं होने वाली हैं। पहली घटना सूर्यग्रहण है। इसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा इस तरह आ जाएगा कि सूर्य का आधे से ज्यादा हिस्सा छिप जाएगा और कंगन की तरह दिखाई देगा। इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है।

 

दूसरी घटना, 21 को ही सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर आ जाएगा। जिससे ये साल का सबसे बड़ा दिन भी होगा। ये सदी का दूसरा ऐसा सूर्यग्रहण है, जो 21 जून को हो रहा है। इससे पहले 19 वर्ष पूर्व 2001 में 21 जून को सूर्य ग्रहण हुआ था।

 

 

साधकों और ज्योतिष के नजरिये से 21 जून, यानी रविवार को होने वाले सूर्य ग्रहण पर ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है, जो 500 सालों में नहीं बनी। श्री  पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महंत श्री आनंद गिरी महाराज(आत्या) बाबा) की माने ताे आषाढ़ महीने में लग रहे इस सूर्य ग्रहण के समय 6 ग्रह वक्री रहेंगे। यह स्थिति देश और दुनिया के लिए ठीक नहीं है।दूसरी ओर महंत श्री आनंद गिरी महाराज का कहना है कि ज्यादा योतिषीय दृष्‍टि से इसका असर बहुत अच्‍छा नहीं मिलने जा रहा है। देश -विदेश पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था में और गिरावट आने के संकेत हैं। वही विश्व व्यप्पी माहमारी के साथ अन्य महामारियों फैलने के कारण मृत्युदर मे और बढ़ोतरी हो सकती है साथ ही तूफान और भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं। यह सूर्य ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र और मिथुन राशि में होगा। जिनका जन्म नक्षत्र मृगशिरा और जन्म राशि या जन्म लग्न मिथुन है। उनके लिए यह विशेष अरिष्ट फल प्रदान करने वाला होगा। सूर्य ग्रहण प्रात: 9:26 बजे से अपराह्न 3:28 तक रहेगा। भारत में यह ग्रहण प्रात:10 बजे से 14:30 बजे तक अर्थात साढ़े चार घंटे रहेगा। इस ग्रहण के दौरान सूर्य 94 फीसदी ग्रसित हो जाएगा। दिन में अन्धेरा जा जाएगा। कुछ जगह तारे भी दिखाई दे सकते हैं। साथ ही मंहत श्री आनंद गिरी महाराज ने यह भी बताया कि यह कंकणाकृति ग्रहण होगा जिसमें सूर्य वलयाकार दिखाई देगा। ऐसी स्थिति में जब ग्रहण चरम पर होता है तो सूर्य किसी चमकते हुए कंगन, रिंग या अंगूठी की नज़र आता है। ठीक ऐसा ही ग्रहण 25 साल पहले यानी वर्ष 1995 में लगा था। 24 अक्‍टूबर 1995 का दिन आज भी देश के लोगों को अच्‍छी तरह से याद है जब भरे दिन में अंधेरा हो गया था। यूं लगा मानो रात हो गई है। पक्षी भी अपने घोंसलों की ओर लौट आए थे। चारों तरफ सर्द हवाएं बह रही थीं।अब 21 जून, 2020 को लगने जा रहा सूर्य ग्रहण भी कंकणाकृति होगा जो पुराने ग्रहण की याद ताजा़ करेगा।

 

ग्रहण का सूतक:

सूर्य ग्रहण का सूतक 20 जून को रात्रि 10:20 से आरंभ हो जाएगा।         

 

21 जून की सुबह 9 बजकर 15 मिनट से  दोपहर 15 बजकर 03 मिनट तक भारत, दक्षिण पूर्व यूरोप और एशिया मे रहेगा वही 5 जुलाई 2020 चंद्र ग्रहण सुबह 08 बजकर 37 मिनट से 11 बजकर 22 मिनट तक

अमेरिका, दक्षिण पूर्व यूरोप और अफ्रीका  मे रहेगा इसका प्रभाव भारत में नहीं रहेगा ,सूतक काल में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए। इस अवधि में खाद्य पदार्थो में तुलसी दल या कुशा रखनी चाहिए।गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ग्रहण काल में सोना और देर तक नहीं बैठना चाहिए। चाकू, छुरी से सब्जी,फल आदि काटना भी निषिद्ध माना गया है।

 

ग्रहण का फल:

मेष, सिंह, कन्या और मकर राशि वालों को शुभ है जबकि वृषभ, तुला, धनु, और कुंभ राशि वालों को मध्यम लाभ देगा। कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों को अशुभ फल देगा। इसमें वृश्चिक राशि वालों को विशेष ध्यान रखना होगा। गुरु शनि वक्री जैसे तीन ग्रह वक्री रहेंगे, जिसके कारण प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। शेयर बाजार से जुड़े हुए लोग सावधान रहें। यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर बुरा प्रभाव डालेगा। किसी ख्यातिप्राप्त व्यक्ति की रहस्यात्मक मौत भी हो सकती है। परिवार में वाद विवाद का सामना करना पड़ सकता है।

 

6 ग्रहों के वक्री होने से ग्रहण खास होगा:::-

श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के महंत व साधक श्री आनन्द गिरी महाराज के अनुसार यह ग्रहण राहुग्रस्त है। मिथुन राशि में राहु सूर्य-चंद्रमा को पीड़ित कर रहा है। मंगल जल तत्व की राशि मीन में है और मिथुन राशि के ग्रहों पर दृष्टि डाल रहा है। इस दिन बुध, गुरु, शुक्र और शनि वक्री रहेंगे। राहु और केतु हमेशा वक्री ही रहते है। इन 6 ग्रहों की स्थिति के कारण ये सूर्य ग्रहण और भी खास हो गया है।

 

 

 क्या करें और क्या नहीं? 

ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलें। ग्रहण से पहले स्नान करें। तीर्थों पर न जा सकें तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं। ग्रहण के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धा के अनुसार दान करना चाहिए। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान सोना, यात्रा करना, पत्ते का छेदना, तिनका तोड़ना, लकड़ी काटना, फूल तोड़ना, बाल और नाखून काटना, कपड़े धोना और सिलना, दांत साफ करना, भोजन करना, शारीरिक संबंध बनाना, घुड़सवारी, हाथी की सवारी करना और गाय-भैंस का दूध निकालना। इन सब बातों की मनाही है।

 

                                                                                   (नोट : - ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)